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यूपी का रण : आम को खास बनाती है नवाबी सियासत, कई सीटों पर कांटे की टक्कर, लखनऊ मंडल की रिपोर्ट

अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 17 Dec 2021 06:33 AM IST
सार

वैसे तो लखनऊ दुनिया भर में चिकन के कपड़ों और फलों के राजा आम की दशहरी समेत कई किस्मों के लिए मशहूर है, मगर इसका सियासी मिजाज आम कभी नहीं रहा। त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अनुज लक्ष्मण की नगरी से यात्रा शुरू करने वाला यह शहर महाराजा बिजली पासी और नवाबों की नगरी भी बना। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की कोख से आधुनिक नगरी के स्वरूप के विस्तार तक की यात्रा शुरू कर प्रदेश की राजधानी बना, लेकिन मंडल के सभी छह जिलों की सियासत तीन दशक से समय-समय पर अलग-अलग करवट लेती रही है। शुरू में कांग्रेस के साथ, फिर स्थानीय समीकरणों या वक्त के साथ अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग रंग लेते हुए...।

सांकेतिक चित्र..
सांकेतिक चित्र.. - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सियासत की तरह इस मंडल में विकास की रफ्तार भी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रही। लखनऊ तेज रफ्तार से लगातार बदल रहा है, पर मंडल के अन्य जिलों को आज भी अपेक्षा के अनुरूप विकास न होने का दर्द साल रहा है। हालांकि राजधानी में भी जाम, सफाई, चिकित्सा सुविधाएं, शुद्ध पेयजल जैसे मुद्दों पर अब भी जब-तब लोगों का आक्रोश सार्वजनिक हो जाता है।



बहरहाल, 2017 के चुनाव में इस मंडल में विधानसभा की 46 सीटों में भाजपा ने 38 पर झंडा फहराया था, लेकिन 2012 में उसे करारी शिकस्त का भी सामना करना पड़ा था। यहां तक कि गढ़ समझी जाने वाली राजधानी लखनऊ की 9 में सिर्फ एक ही सीट जीत पाई थी। सात सीटों पर सपा की साइकिल पूरी रफ्तार से दौड़ी तो एक पर कांग्रेस ने झंडा फहराया था। लखनऊ ही नहीं, मंडल के सियासी मिजाज को मुनव्वर राणा की इन पंक्तियों से बखूबी समझा जा सकता है... बड़ी मुश्किल से आते हैं समझ में लखनऊ वाले। दिलों में फासले लब पर मगर आदाब रहता है।


कड़े मुकाबले की बनती पृष्ठभूमि की एक झलक
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली में पार्टी 2017 में महज दो सीटों पर सिमट कर रह गई। रायबरेली की 6 सीटों में भाजपा ने तीन पर,  कांग्रेस ने सदर और हरचंदपुर तथा सपा के नेता पूर्व मंत्री डॉ. मनोज पांडेय ने ऊंचाहार सीट जीती थी। रायबरेली से जीते कांग्रेस के दोनों विधायक भाजपा के पाले में हैं।

एक अदिति सिंह भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, जबकि दूसरे हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह तकनीकी रूप से भले ही अभी कांग्रेस में हों, लेकिन व्यावहारिक रूप से वह भाजपा के साथ ही हैं। रायबरेली की सलोन सीट से जीते भाजपा विधायक पूर्व मंत्री दलबहादुर कोरी का कोरोना के दौरान निधन हो गया। इस प्रकार अब रायबरेली में जो पांच विधायक हैं उनमें चार सीट भाजपा के पास और एक सपा के पास है। हरदोई की आठ सीटों में भाजपा सात पर जबकि हरदोई सदर से सपा के नितिन अग्रवाल जीते थे। पर, विधानसभा के उपाध्यक्ष नितिन भी अब व्यावहारिक तौर पर भाजपा में आ चुके हैं।  

  • सीतापुर की नौ सीटों में भाजपा ने सात, बसपा ने सिधौली एवं सपा ने महमूदाबाद सीट जीती थी। इस जिले में भी राजनीति बदल चुकी है। भाजपा के राकेश राठौर और  सिधौली से जीते बसपा के हरगोविंद भार्गव अब व्यावहारिक तौर पर सपा में जा चुके हैं।
  • उन्नाव की 6 सीटों में भाजपा ने 5 जीती थीं लेकिन पुरवा से बसपा के टिकट पर जीते अनिल सिंह भी अब व्यावहारिक तौर पर भाजपा के साथ हैं।
  • विधानसभा के पिछले चुनाव में लखीमपुर खीरी की सभी आठ सीटों पर भाजपा ने झंडा फहराया था। बदले समीकरणों के साथ लखीमपुर खीरी का तिकुनिया कांड और इसमें  केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष पर शामिल होने के आरोप, सीतापुर से जीते विधायक राकेश राठौर के बागी तेवर और अब उनके सपा में शामिल हो जाने और मंडल के जिलों का चुनावी इतिहास देखते हुए भाजपा का ज्यादातर सपा और कुछ स्थानों पर बसपा से कड़े मुकाबले के आसार हैं।

...पर उपचुनाव की जीत से राहत

भाजपा ने उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर हुए उपचुनाव को भी जीत लिया। यहां पर 2017 में जीते भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को दुष्कर्म के आरोप में उम्र कैद की सजा मिली। सेंगर की विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के बाद यहां उपचुनाव हुआ था। लखनऊ की कैंट सीट का उपचुनाव भी भाजपा ने ही जीता। इस सीट पर 2017 में जीतीं भाजपा की डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के लोकसभा चुनाव जीतने के कारण उनके त्यागपत्र दे देने से उपचुनाव हुआ था।

बसपा-कांग्रेस का व्यावहारिक तौर पर प्रतिनिधित्व ही नहीं
मंडल में आने वाली विधानसभा की 46 सीटों में से 2017 में 38 जीतने वाली भाजपा अब बसपा के एक और कांग्रेस के दो विधायकों के पार्टी में आ जाने और सपा के एक विधायक नितिन अग्रवाल को साथ ले लेने के कारण व्यावहारिक रूप से 39 पर पहुंच गई है। यह संख्या 42 होती लेकिन कुछ दिनों पहले रायबरेली के दलबहादुर कोरी और लखनऊ के पश्चिम सीट से विधायक सुरेश श्रीवास्तव का निधन हो चुका है।

वहीं, भाजपा के टिकट पर सीतापुर सदर से जीते राकेश राठौर अब सपा में जा चुके हैं। सपा ने राकेश राठौर के रूप में जहां भाजपा से नितिन अग्रवाल का हिसाब-किताब चुकता कर लिया है तो बसपा के सिधौली से विधायक हरि गोविंद भार्गव को पार्टी में लेकर 2017 में मंडल में मिलीं चार सीटों के मुकाबले अपनी संख्या में एक इजाफा कर 5 कर ली है। साथ ही सत्तारूढ़ दल भाजपा से मुख्य मुकाबला सजाने का संकेत भी दे दिया है। रोचक बात यह है कि दो-दो सीटें जीतने वाली बसपा और कांग्रेस का इस समय व्यावहारिक रूप से इस मंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है।

सियासी रूप से समृद्ध रहा है यह मंडल
प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के परिवार की सदस्य विजय लक्ष्मी पंडित को अपना पहला सांसद चुनने वाला लखनऊ ही नहीं, इस पूरे मंडल की धरती सियासी तौर पर काफी समृद्ध रही है। चंद्रभानु गुप्त एवं रामप्रकाश गुप्त के रूप में राजधानी से दो मुख्यमंत्री हुए। कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम कर चुके डॉ. अम्मार रिजवी भी इस मंडल के सीतापुर के रहने वाले हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, भाऊराव देवरस जैसी शख्सियतों ने इस धरती पर हिंदुत्व की राजनीतिक चेतना के बीज बोए। उन्नाव के भगवंतनगर से भाजपा के टिकट पर जीते हृदयनारायण दीक्षित विधानसभा अध्यक्ष हैं तो हरदोई से सपा के टिकट पर जीते नितिन अग्रवाल विधानसभा उपाध्यक्ष। केंद्र में रक्षामंत्री के रूप में राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के रूप में अजय मिश्र, केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री के रूप में कौशल किशोर सत्ता संचालन का हिस्सा हैं। लखनऊ से उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के अलावा छह अन्य मंत्री प्रदेश सरकार का हिस्सा हैं। अभी कुछ महीने पहले कांग्रेस से आए और लखीमपुर खीरी के धौरहरा से राजनीति करने वाले जितिन प्रसाद भी प्रदेश सरकार में मंत्री बन गए हैं।
 

जिन्होंने दी शहर के विकास को रफ्तार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व नगर विकास मंत्री लालजी टंडन के बाद अब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की नुमाइंदगी वजह हो अथवा लखनऊ का राजधानी होना, लखनऊ तेजी से बदला है। बदलने की रफ्तार अब भी तेजी से जारी है। न सिर्फ सड़कों और पुलों के मामले में बल्कि चिकित्सा व शिक्षण संस्थानों के साथ रोजगार देने वाले उद्यम स्थापित करने में भी।

शहरों में दबदबा बनाए रखने की चाहत हो या फिर कुछ और लखनऊ को सबने बदला। फिर चाहे मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी रहे हों, मुलायम सिंह यादव रहे हों, मायावती रही हों या फिर अखिलेश यादव सभी ने लखनऊ के विकास को रफ्तार दी। इसी का नतीजा है शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए बन चुके या बन रहे तमाम पुल, रिंग रोड, ओवरब्रिज और मेट्रो। लखनऊ से दिल्ली की यात्रा को सुगम बनाने वाला आगरा एक्सप्रेसवे हो या गाजीपुर आसानी से पहुंचाने वाला पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, हवाई अड्डे का विस्तार हो या दिल्ली-कानपुर सहित दूसरे राज्यों को लखनऊ से होकर जाने वाले वाहनों का शहर पर दबाव कम करने के लिए बन रहा किसान पथ, बहुत कुछ बदलाव आया है। चिकित्सा, शिक्षा एवं रोजगार के मोर्चे पर भी कई काम हुए हैं।

उन्नाव में फ्लोराइड युक्त पानी मुसीबत
उन्नाव के बांगरमऊ में कल्याणी नदी पर पुल की मांग बड़ा मुद्दा है तो सफीपुर के लोगों की मांग है कि फलपट्टी होने के बावजूद कोई मंडी नहीं होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। व्यापारी विजय कुशवाहा और वकार अहमद कहते हैं कि मंडी बन जाए तो बाग लगाने वालों को और सुविधा हो जाए। उन्नाव के पानी में फ्लोराइड की अधिकता कई वर्षों से लोगों के स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बनी हुई है। सेवानिवृत्त अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस मिश्र कहते हैं,चुनाव के दौरान सभी इस समस्या के समाधान का आश्वासन देते हैंै, हुआ कुछ नहीं।

जाम और बेरोजगारी बने सवाल
सीतापुर के महमूदाबाद के शिक्षक रमेश वाजपेयी कहते हैं, उपेक्षा के चलते कताई मिल बंद हो गई और अब उसकी जमीन पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। रोजगार एवं बाढ़ बड़ी समस्याएं हैं। बिसवां के अश्विनी तिवारी कहते हैं, सीतापुर के बिसवां-सिधौली मार्ग पर रेलवे लाइन के ऊपर ब्रिज काफी जरूरी है। हर चुनाव में इसे बनवाने का वादा होता है। पर, पूरा नहीं होता। आराध्य शुक्ल भी ऐसे ही सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, बिसवां ही नहीं, महमूदाबाद-सिधौली, महमूदाबाद-लखनऊ वाया टिकैतगंज-कुर्सी वाले मार्ग पर भी क्रॉसिंग पर पुल नहीं होना बड़ी समस्या है। इसी तरह नूरपुर के पुल पर भी काफी जाम लगता है।

सीटों का गणित...

हरदोई (8 सीटें)
बालामऊ : (सु.) रामपाल वर्मा भाजपा से जीते। बसपा सरकार में वह परती भूमि विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार भी रहे।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 80 हजार, अन्य अनुसूचित जातियां 60 हजार, मुस्लिम 28 हजार, क्षत्रिय 26 हजार, ब्राह्मण 19 हजार, यादव 18 हजार।
संडीला : भाजपा के राजकुमार अग्रवाल विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 49 हजार, अनुसूचित जातियां 48 हजार, अर्कवंशी 43 हजार, ब्राह्मण 31 हजार, यादव व पासी 25-25 हजार, क्षत्रिय 21 हजार, धोबी 11 हजार।
बिलग्राम-मल्लावां : भाजपा के आशीष कुमार सिंह आशू विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : कुर्मी 61 हजार, मुस्लिम 54 हजार, अनुसूचित जातियां 39 हजार, यादव 28 हजार, ब्राह्मण 18 हजार, क्षत्रिय 11 हजार, पाल 17 हजार।
गोपामऊ (सु.) : भाजपा के श्याम प्रकाश विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 64 हजार, पासी 55 हजार, ब्राह्मण 41 हजार, मुस्लिम 37 हजार, क्षत्रिय 32 हजार, यादव 18 हजार, पाल 14 हजार। 
सवायजपुर : भाजपा के माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 82 हजार, यादव 79 हजार, क्षत्रिय 54 हजार, मुस्लिम 22 हजार, अनुसूचित जातियां 23 हजार, पाल 16 हजार।
शाहाबाद : भाजपा से रजनी तिवारी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 77 हजार, ब्राह्मण  46 हजार, अनुसूचित जातियां 41 हजार, यादव 27 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, पासी 21 हजार।
सांडी (सु.) : भाजपा के प्रभाष कुमार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 47 हजार, यादव व पासी 36-36 हजार, क्षत्रिय 35 हजार, मुस्लिम 30 हजार, ब्राह्मण 24 हजार धोबी 18 हजार, पाल 13 हजार।
हरदोई सदर : सपा सेे नितिन अग्रवाल जीते। विधानसभा उपाध्यक्ष हैं।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 61 हजार, अन्य अनुसूचित जातियां 41 हजार, क्षत्रिय 60 हजार, ब्राह्मण 44 हजार, मुस्लिम 30 हजार व अन्य।

उन्नाव (6 सीटें)
बांगरमऊ : भाजपा के श्रीकांत कटियार विधायक हैं। उपचुनाव में जीते।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 58 हजार, पाल 38 हजार, कुरील 34 हजार, लोध, निषाद 33 हजार, पासी 26 हजार, ब्राह्मण व काछी 24-24 हजार,  यादव 20 हजार व अन्य।
सफीपुर : भाजपा के बी. दिवाकर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : रावत करीब 73 हजार, रैदास 67 हजार, ब्राह्मण 36 हजार, लोधी 32 हजार, मुस्लिम 31 हजार, क्षत्रिय 22 हजार व अन्य।
भगवंतनगर : विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 70 हजार, क्षत्रिय 48 हजार, रैदास 44 हजार, लोधी व रावत 36-36 हजार, कुर्मी 34 हजार, यादव 31 हजार, मुस्लिम 23 हजार। 
पुरवा : बसपा से अनिल सिंह जीते। बहरहाल वह भाजपा के खेमे में शामिल हो गए।
जातिगत समीकरण : लोधी करीब 82 हजार, यादव 69 हजार, ब्राह्मण 47 हजार, रावत 38 हजार, मुस्लिम 34 हजार, क्षत्रिय 22 हजार।
मोहान : भाजपा के ब्रजेश रावत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मौर्या करीब 25 हजार, लोधी 21 हजार, ब्राह्मण 18 हजार, निषाद 17 हजार, पाल 14 हजार।
उन्नाव सदर : भाजपा के पंकज गुप्ता विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 67 हजार, लोधी 54 हजार, मुस्लिम 43 हजार, क्षत्रिय व पासी 34-34 हजार, केवट 25 हजार, वैश्य 24 हजार।

रायबरेली ( 6 सीटें) 
सदर : कांग्रेस से अदिति सिंह जीती     हैं। अब भाजपा में। 
जातिगत समीकरण : पासी करीब 1.40 लाख, ब्राह्मण 40 हजार, क्षत्रिय 38 हजार, मुस्लिम 45 हजार।
सरेनी : भाजपा के धीरेंद्र प्रताप सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 70 हजार, क्षत्रिय 65 हजार, पासी 50 हजार, यादव 46 हजार, मुस्लिम 45 हजार।
ऊंचाहार : पूर्व मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 64 हजार, यादव 42 हजार, ब्राह्मण 37 हजार, क्षत्रिय 36 हजार, मौर्य 25 हजार, मुस्लिम 18 हजार।
सलोन :  भाजपा से दल बहादुर कोरी जीते थे।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 90 हजार, मौर्या, कुर्मी, यादव व मुस्लिम 35-35 हजार, कोरी 34 हजार, ब्राह्मण व लोधी 20-20 हजार, क्षत्रिय 16 हजार।
बछरावां : भाजपा के रामनरेश रावत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 70 हजार, कुर्मी और लोध 45 हजार, ब्राह्मण व यादव 40-40 हजार, क्षत्रिय 37 हजार, मुस्लिम 35 हजार।
हरचंदपुर : कांग्रेस से राकेश सिंह विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : यादव करीब 40 हजार, पासी 33 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, क्षत्रिय 27 हजार व अन्य।

सीतापुर (9 सीटें)
लहरपुर : भाजपा के सुनील वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 75 हजार, पासी 70 हजार, कुर्मी 40 हजार, ब्राह्मण 22 हजार, क्षत्रिय 12 हजार, यादव 15 हजार, गौतम 20 हजार, अन्य अनुसूचित जातियां10 हजार।
महमूदाबाद : सपा के नरेंद्र सिंह वर्मा विधायक हैं।
जातीय समीकरण : कुर्मी करीब 80 हजार, मुस्लिम 60 हजार, क्षत्रिय 35 हजार, जाटव 28 हजार, अन्य अनुसूचित जातियां 35 हजार, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, सैनी 18 हजार, ब्राह्मण 17 हजार, केवट 15 हजार।
हरगांव : भाजपा के सुरेश राही विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  पासी करीब 91 हजार, अन्य अनुसूचित जाति व जनजाति 71 हजार, कुर्मी 41 हजार, ब्राह्मण 31 हजार, मुस्लिम 27 हजार, क्षत्रिय 16 हजार।
सिधौली : बसपा के हरगोविंद भार्गव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : रावत करीब 85 हजार, यादव 52 हजार, गौतम 40 हजार, ब्राह्मण 39 हजार, मुस्लिम 37 हजार, क्षत्रिय 20 हजार।
बिसवां : भाजपा के महेंद्र सिंह यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 65 हजार, यादव 40 हजार, कुर्मी 30 हजार, क्षत्रिय व पासी 25-25 हजार, जाटव 20 हजार, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य व अन्य।
सीतापुर : भाजपा के राकेश राठौर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1 लाख, ब्राह्मण 60 हजार, पासी 28 हजार, जाटव 25 हजार व अन्य।
सेवता : भाजपा के ज्ञान तिवारी विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 65 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, अनुसूचित जातियां 43 हजार, यादव 30 हजार।
मिश्रिख : भाजपा के रामकृष्ण भार्गव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 65 हजार, गौतम 57 हजार, क्षत्रिय, ब्राह्मण वैश्य 40 हजार, मुस्लिम व यादव 10-10 हजार।
महोली : भाजपा के शशांक त्रिवेदी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 91 हजार, ब्राह्मण 60 हजार, कुर्मी 30 हजार, मुस्लिम 25 हजार, क्षत्रिय 20 हजार, यादव 18 हजार व अन्य

लखनऊ (9 सीटें) 
मोहनलालगंज : सपा से अम्बरीष सिंह पुष्कर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पासी करीब 1.20 लाख, यदव व कुर्मी 39-39 हजार, मुस्लिम 32 हजार, ब्राह्मण 19 हजार, गौतम, 18 हजार, लोधी 16 हजार व अन्य। 
मलिहाबाद : भाजपा की जय देवी कौशल विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1.75 लाख, मुस्लिम 55 हजार, यादव व मौर्य 40 हजार, क्षत्रिय 20 हजार, वैश्य व ब्राह्मण 10-10 हजार। 
सरोजनीनगर : मंत्री स्वाति सिंह यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 1.10 लाख, अनुसूचित जातियां 90 हजार, ओबीसी 80 हजार, क्षत्रिय 60 हजार, मुस्लिम 30 हजार।
लखनऊ पूर्वी : मंत्री आशुतोष टंडन यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 80 हजार, क्षत्रिय 70 हजार, ब्राह्मण 65 हजार, मुस्लिम 40 हजार, कायस्थ 30 हजार, यादव 25 हजार। 
लखनऊ उत्तर : नीरज बोरा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण व मुस्लिम करीब 80- 80 हजार, यादव 40 हजार, श्रीवास्तव 35 हजार, अनुसूचित जातियां 30 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 45 हजार, क्षत्रिय व वैश्य 25-25 हजार।
कैंट : भाजपा से सुरेश तिवारी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 1.50 लाख, मुस्लिम 40 हजार, सिंधी/पंजाबी 50 हजार, वैश्य 25 हजार, अनुसूचित जातियां 25 हजार व अन्य।
लखनऊ मध्य : मंत्री ब्रजेश पाठक    यहां से विधायक हैं। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब  90 हजार, वैश्य, तेली, भुर्जी 80 हजार, कायस्थ 50 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, सोनकर 25 हजार, धानुक 10 हजार।
लखनऊ पश्चिम : भाजपा के सुरेश श्रीवास्तव विधायक थे। अप्रैल महीने में कोरोना संक्रमण के चलते उनका निधन हो गया। 
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.50 लाख, ब्राह्मण 50 हजार, कायस्थ 45 हजार, पासी 35 हजार, यादव 25 हजार, लोधी 15 हजार व अन्य।
बीकेटी : भाजपा के अविनाश त्रिवेदी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1.20 लाख, यादव 90 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, लोधी 30 हजार, मुस्लिम 25 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 50 हजार।

लखीमपुर खीरी ( 8 सीटें) 
पलिया : भाजपा से रोमी साहनी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 65 हजार, मौर्य 40 हजार, मुस्लिम 35 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, यादव 32 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 32 हजार व अन्य।
निघासन : भाजपा के शशांक वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 61 हजार, मौर्या 51 हजार, यादव 31 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 36 हजार, मुस्लिम 35 हजार, ब्राह्मण 28 हजार, वैश्य 27 हजार व अन्य।
गोला : भाजपा से अरविंद गिरि विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 66 हजार, यादव 36 हजार, मौर्या 38 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 40 हजार,  मुस्लिम 39 हजार, ब्राह्मण 38हजार, वैश्य 32 हजार व अन्य।
श्रीनगर : भाजपा से मंजू त्यागी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 61 हजार, मौर्या 35 हजार, यादव व मुस्लि 33 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 32 हजार व अन्य।
धौरहरा : भाजपा से  बाला प्रसाद अवस्थी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 60 हजार, मौर्या 40 हजार, यादव 32 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 33 हजार, मुस्लिम 38 हजार, ब्राह्मण 30 हजार व अन्य।
लखीमपुर सदर : भाजपा से योगेश कुमार वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 65 हजार, कुर्मी 56 हजार, मुस्लिम 55 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 56 हजार, वैश्य 51 हजार, ब्राह्मण 36 हजार व अन्य।
कस्ता : भाजपा से सौरभ सिंह सोनू विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 60 हजार, कुर्मी व मुस्लिम 36-36 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 35 हजार, वैश्य 32 हजार, ब्राह्मण 28 हजार, क्षत्रिय 21 हजार व अन्य।
मोहम्मदी : भाजपा से लोकेंद्र प्रताप    सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 63 हजार, मुस्लिम 52 हजार, कुर्मी 31 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 35 हजार, ब्राह्मण व कुर्मी 31-31 हजार व अन्य।
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