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Chaitra Navratri 2023 Live:देवी आराधना का महापर्व आज, जानिए नवरात्रि पर क्या करें और क्या नहीं

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 22 Mar 2023 02:20 PM IST
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चैत्र नवरात्रि 2023 : - फोटो : अमर उजाला

खास बातें

Chaitra Navratri 2023 Date and Time Subh Muhurat Puja Vidhi in Hindi: आज से देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए हैं।  अब से लगातार 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा और साधना बड़े ही भक्ति भाव से की जाएगी। चैत्र नवरात्रि के शुरू होने के साथ ही आज से हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो गया है। महाराष्ट्र में चैत्र प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। 
 

लाइव अपडेट

01:50 PM, 22-Mar-2023

एक साल में चार बार नवरात्रि आती है

आज से चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है जो 30 मार्च तक चलेगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व के विशेष महत्व होता है जिसमें नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। एक साल में कुल चार बार नवरात्रि का पर्व आता है जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और एक शारदीय और एक चैत्र नवरात्रि होते हैं। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रि का त्योहार मनाते है जबकि गुप्त नवरात्रि तांत्रिक क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है। 
 
01:09 PM, 22-Mar-2023
नवरात्रि पर क्या करें 
1-नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
2- नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
3-नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
4-देवी मां को प्रतिदिन करें जल अर्पित
5-नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
6- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
7- ब्रह्राचर्य का पालन करें

नवरात्रि पर क्या न करें
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। घर के सदस्य अगर नौ दिनों तक व्रत नहीं रखे हुए हैं तो भी नौ दिनों तक भोजन में छौंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
 
12:46 PM, 22-Mar-2023

चैत्र नवरात्रि के उपाय

शास्त्रों के अनुसार चैत्र नवरात्रि पर 9 दिनों तक पूजा, व्रत और उपासना करने पर मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।  जो लोग नवरात्रि पर सभी 9 दिनों तक व्रत नहीं रख पाते है उन्हें पहले और अष्टमी तिथि पर नवरात्रि का व्रत जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए अखंड ज्योतिष जरूर जलाएं और नवरात्रि के हर दिन पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। 
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12:29 PM, 22-Mar-2023

दोपहर और शाम के समय कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2023

अगर आप किसी कारण से सुबह के समय कलश स्थापना नहीं कर पाए हैं तो इस मुहूर्त में भी घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:47 से 03: 35 तक
शाम का मुहूर्त- 06: 50 से 08:01 तक
11:31 AM, 22-Mar-2023

नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व

शास्त्रों के अनुसार 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्या पूजन में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को घर पर बुलाकर उनका पूजन और भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं। 
11:01 AM, 22-Mar-2023

इस बार मां दुर्गा की सवारी नौका

आज से अगले 9 दिनों तक देवी दुर्गा पृथ्वी पर वास करेंगे और अपने भक्तों की हर एक मनोकामनाओं की पूरा करेंगी। साल 2023 की चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन नाव की सवारी के साथ हुआ है। दरअसल इस वर्ष चैत्र नवरात्रि बुधवार के दिन से प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा की सवारी नौका है। नौका पर सवारी करते हुए मां का पृथ्वी लोक में आने से जीवन में सुख और समृद्धि आएगी।
 
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10:49 AM, 22-Mar-2023

पंचक में शुरू हुई चैत्र नवरात्रि

आज चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि है और माता भगवती के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा आराधना के साथ नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार नवरात्रि पंचक लगने के दौरान प्रारंभ हुई है। पंचक की शुरुआत 19 मार्च से हुई है जो 23 मार्च तक रहेगी। ऐसे में नवरात्रि के पहले 2 दिन पंचक में देवी दुर्गा का आराधना की जाएगी। शास्त्रों में पंचक के दौरान शुभ कार्य करना वर्जित होता है लेकिन इस दौरान पूजा-पाठ में किसी तरह की रोकथाम नहीं होती है।
10:29 AM, 22-Mar-2023

नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशी पाठ का महत्व

प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ आने वाले नौ दिनों तक माता की पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि पर हर दिन उपवास, पूजा-आराधना, पाठ, आरती और मां को भोग अर्पित कर  सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नवरात्रि पर माता को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशी का पाठ अवश्य किया जाता है। नवरात्रि पर जो भी दुर्गा सप्तशी का विधिवत पाठ करता है उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। दुर्गा सप्तशी में देवी को प्रसन्न करने के कई सिद्धि मंत्र है जिसका जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। 

22 से 30 मार्च तक देवी दुर्गा की पूजा उपासना और साधना का महापर्व नवरात्रि मनाया जाएगा। आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और कलश स्थापना के साथ विधि-विधान से देवी मां की उपासना का नौ दिनों का व्रत साधना चलेगी। नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशी के पाठ का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसारनवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शांति, धन, सुख- समृद्धि, यश और मान- सम्मान की प्राप्ति होती है।

सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें तीन चरित्र यानी हिस्सों में बांटा गया है। प्रथम चरित्र में मधु कैटभ वध की कथा है। मध्यम चरित्र में सेना सहित महिषासुर के वध की कथा है और उत्तर चरित्र में शुम्भ निशुम्भ वध और सुरथ एवं वैश्य को मिले देवी के वरदान की कथा है। हर अध्याय के पाठ का अलग-अलग फल मिलता है। अलग- अलग मनोकामना के अनुसार दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए। 
10:06 AM, 22-Mar-2023

नवरत्रि पर दुर्गा सप्तशी पाठ का महत्व

प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ आने वाले नौ दिनों तक माता की पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि पर हर दिन उपवास, पूजा-आराधना, पाठ, आरती और मां को भोग अर्पित कर  सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नवरात्रि पर माता को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशी का पाठ अवश्य किया जाता है। नवरात्रि पर जो भी दुर्गा सप्तशी का विधिवत पाठ करता है उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। दुर्गा सप्तशी में देवी को प्रसन्न करने के कई सिद्धि मंत्र है जिसका जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। 
09:45 AM, 22-Mar-2023
आज से 9 दिनों तक नवरात्रि का पर्व चलेगा, जिसमें देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि के पहले दिन क्यों घटस्थापना की जाती है?  शास्त्रों के अनुसार कलश स्थापना के पीछे ऐसी मान्यता है कि कलश में भगवान विष्णु का रूप होता है। इसके अलावा कलश में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए नवरात्रि पर सभी देवी -देवताओं को पूजा में आमंत्रित करने के लिए घट की पूजा होती है। 
 
09:16 AM, 22-Mar-2023

आरती के बिना अधूरी है मां दुर्गा की उपासना

navratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी
08:46 AM, 22-Mar-2023

जानिए हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080 की खास बातें

आज से हिंदू कैलेंडर के नए वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो गई है। चैत्र का महीना हिंदू कैलैंडर का पहला और फाल्गुन आखिरी महीना होता है। विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने शुरू की थी। हिंदू नववर्ष के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें-  Vikram Samvat 2080: आज से शुरू हुआ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080, जानिए हिंदू कैलेंडर की 10 खास बातें

08:40 AM, 22-Mar-2023

हिंदू नववर्ष की शुरूआत शुभ योग के साथ

चैत्र प्रतिपदा तिथि से ही नवरात्रि के शुरू होने के साथ नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो चुका है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन ब्रह्रााजी ने सृष्टि की रचना की थी। इस बार हिंदू नववर्ष 2080 के पहले दिन की शुरुआत बहुत ही शुभ योग के साथ हुई है। ज्योतिष गणना के मुताबिक आज 4 तरह के राजयोग बना हुआ है। जिसमें गजकेसरी, बुधादित्य, हंस और नीचभंग राजयोग है। इसके अलावा आज ही शुक्ल और ब्रह्रा योग भी बन रहा है।
08:31 AM, 22-Mar-2023

नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जौ

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन ही घटस्थापना के साथ ही जौ बोए जाते हैं। मान्यता है कि इसके बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी रह जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की तब वनस्पतियों में जो फसल सबसे पहले विकसित हुई थी वो जौ ही थी। यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ पूरे विधि-विधान से जौ बोई जाती है। 
08:22 AM, 22-Mar-2023
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना और साधना का महापर्व आरंभ हो जाता है। नवरात्रि में देवी पूजन के लिए कई तरह की सामग्रियों की जररूत होती है। 
  • चौड़े मुंह वाला मिट्टी का बर्तन
  • पवित्र जगह की मिट्टी
  • 7 प्रकार के अनाज
  • कलश
  • जटाओं वाला नारियल
  • लाल रंग का कपड़ा
  • फूल
  • माला
  • मिठाई
  • दूर्वा
  • सिंदूर
  • गंगाजल
  • कलावा
  • सुपारी
  • आम या अशोक के पत्ते 
  • अक्षत 
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