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बच्चे को तरस रहे नि:संतान दंपतियों के लिए अब मौजूद हैं 4 विकल्प

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 04 Sep 2018 09:18 AM IST
There are now many options for Childlessness couples
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नि:संतानता जीवन का एक ऐसा दंश है, जिसकी चुभन संतान नहीं होने तक बनी रहती है। संतान नहीं पाने वाले दम्पती न केवल मानसिक एवं भावनात्मक तनाव में रहते हैं बल्कि सामाजिक परेशानियों का भी सामना करते हैं। दुनियाभर में 20 प्रतिशत से अधिक दम्पतियों को गर्भधारण में अड़चनें आती हैं। प्रजनन क्षमता को लेकर लोगों में आधी-अधूरी जानकारियां और कई गलतफहमियां व्याप्त है, इसके चलते भी लोग नि:संतानता के इलाज में देरी कर देते हैं। हम आपको बताएंगे क्या है नि:संतानता, कौन से कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं और उपचार के ऐसे तरीके मौजूद हैं जिनसे नि:संतानता को दूर किया जा सकता है और स्वस्थ्य संतान की प्राप्ति की जा सकती है। 
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क्या है नि:संतानता
मेडिकल टर्म में अगर कोई दम्पत्ति बिना किसी साधन का इस्तेमाल किए दो साल या इससे भी अधिक समय तक फिजिकल रिलेशनशीप बना रहा है और उसके बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसे नि:संतानता कहा जाएगा। वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रजनन उम्र वाले 27.5 मिलियन दम्पती नि:संतानता से ग्रस्त है। इसमें 40 से 50 फीसदी नि:संतानता की वजह महिला में और 30 से 40 फीसदी कारण पुरुषों में बढ़ा है।इनफर्टिलिटी की बढ़ती वजह शहरीकरण, पर्यावरणीय एवं जीवनशैली को प्रभावित करने वाले कारक हैं। पर्यावरणीय कारण में मिलावट, रासायनों का शरीर में जाना, प्रदूषित पानी एवं हवा है वहीं जीवनशैली के कारकों में तनाव, जरूरत से ज्यादा काम, कुपोषण, मोटापा, एल्कोहल, धूम्रपान देर से शादी होना व यौन संक्रमित बीमरियां गोनोरिया आदि है। 

पुरुष नि:संतानता के कारण
डॉ. पवन यादव, जो कि इंदिरा आईवीएफ के लखनऊ सेंटर में चीफ आईवीएफ स्पेशलिस्ट एंड लेप्रोस्कोपी सर्जन है वह बताते हैं कि पुरुषों में नि:संतानता की वजह शुक्राणुओं की गिनती कम होना, गति कम होना, नहीं होना अथवा शुक्राणु का टेस्टीज में बनना है। एम्स की एक स्टडी कहती है कि तीन दशक पहले जहां वयस्क पुरुष में स्पर्म काउंट 60 मिलियन प्रति एमएल.था वह घट कर 20 मिलियन प्रति एमएल. रह गया। रिप्रोडक्टिव हैल्थ की वर्ल्ड कांग्रेस में बताया गया कि तनाव, पर्यावरण एवं औद्योगिक प्रदूषण से पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता कम हुई है।
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