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पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज हो जाता है, बेहद चौंकाने वाली है ये रिसर्च?

बीबीसी Updated Tue, 04 Sep 2018 12:54 PM IST
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औरतों में माहवारी एक बुनियादी अमल है। यही क़ुदरती अमल उसे समाज में औरत का दर्जा दिलाता है। कहना गलत नहीं होगा कि इंसानी कायनात का दारोमदार इसी पर टिका है। माहवारी से पहले और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और खुद से लड़ाई चलती रहती है। उसके मिजाज में बहुत से बदलाव नजर आने लगते हैं। प्राचीन काल में इसे औरत को पड़ने वाले दौरे के तौर पर देखा जाता था।
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यहां तक कि मिस्र से लेकर ग्रीस के दार्शनिकों का मानना था कि हर महीने औरत के मन में सेक्सुअल डिजायर का उफान उठता है। जब ये डिजायर पूरी नहीं होती तो उसके शरीर से खून का रिसाव शुरू हो जाता है।

ये सही बात है कि माहवारी शुरू होने से पहले औरत के मूड में बदवाल आता है। उसका मिजाज चिड़चिड़ा हो जाता है। शरीर के किसी ना किसी हिस्से में अजीब खिंचाव या दर्द होने लगता है। ये कैफियत इशारा करती है कि अब बस कुछ ही वक्त में ब्लीडिंग शुरू होने वाली है, लेकिन ऐसी कैफियत सभी औरतों की हो ये जरूरी नहीं है। कुछ महिलाओं को दर्द बहुत ज्यादा होता है, कुछ को कम। जबकि कुछ को नाकाबिल-ए-बर्दाश्त दर्द होता है। आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि औरत की ये कैफियत सेक्स से महरूमी के सबब होती है।

यही वजह है कि आज भी कम पढ़े-लिखे लोग लड़कियों को समझाते हैं कि शादी के बाद दर्द की ये शिकायत दूर हो जाएगी, लेकिन मॉडर्न साइंस और रिसर्च माहवारी के दौरान महिलाओं में होने वाले इस बदलाव के कई पॉजिटिव पहलू देखती है।
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