जन्मजात बहरापन का इलाज कॉकलीयर इम्प्लांट, इस महंगे इलाज को सबके लिए संभव बनाता है द हंस फाउंडेशन

फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 05 Jun 2018 08:50 PM IST
द हंस फाउनडेशन
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जन्मजात बहरेपन की बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए द हंस फाउंडेशन ने 2013 में एक बड़ी पहल की शुरुआत की। इसके जरिए 0 से 3 साल के बच्चों के कॉकलीयर इम्प्लांट किए जाते हैं। फाउंडेशन अधिकतम 5 वर्ष तक के बच्चों की मदद करता है। कॉकलीयर इम्प्लांट एक ऐसी सर्जरी है, जिसकी मदद से जन्मजात बहरेपन से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन मिल सकता है। फाउंडेशन का मकसद ऐसे बच्चों की मदद करना है, जिनके माता-पिता उनके इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। कॉकलीयर इम्प्लांट बेहद महंगा होता है,लेकिन इसका खर्च उठाना तो दूर बहुत से माता-पिता तो अपने बच्चों के लिए डिवाइस तक खरीद पाने में असमर्थ महसूस करते हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए द हंस फाउंडेशन बढ़चढ़ कर कार्य कर रहा है। इस प्रोग्राम के तहतएक बच्चे के इम्प्लांट पर करीब 8 लाख रुपये का खर्च आता है।  
 
द हंस फाउंडेशन (THF) ने जन्मजात बहरेपन की बीमारी से जूझ रहे बच्चों के इलाजऔर कॉकलीयर इम्प्लांट के लिए गुड़गांव के कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल और नई दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल के साथ हाथ मिलाया है। 
 
द हंस फाउंडेशन इस प्रोग्राम के तहत 0 से 3 साल के बच्चों को हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए सर्जन और पेरेंट्स के बीच ब्रिज का काम करता है। हां अगर मेडिकल प्रोफेशनल्स किसी 5 साल तक के बच्चे के इलाज की सिफारिश करते हैं तो ऐसे बच्चों की मदद के लिए भी फाउंडेशन तत्परता के साथ काम करता है। जन्मजात बहरेपन का शिकार बच्चों के अलावा फाउंडेशन ऐसे बच्चों की भी मदद करता है जो जन्मजात बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं। साथ ही फाउंउेशन ने प्रोग्राम के तहत विशेष टीम भी बनाई हैं,जो कि हर मरीज की जरूरतों के बारे में उनसे बात करती है और उनकी मदद के लिए जरूरी कदम उठाती है। फाउंडेशन इस काम में  SpHear Clinic (New Delhi) and Swar Clinic (Pitampura) की मदद लेता है, जिनकी विशेष टीमें मरीजों या उनके माता-पिता के साथ लगातार संपर्क में रहती हैं। इन टीमों की मदद से फाउंडेशन का प्रयास यह रहता है कि मरीज को उसके घर के पास ही जितनी ज्यादा से ज्यादा मदद पहुंचा दी जाए। इसके लिए फाउंडेशन की टीमें अलग-अलग रीजन में ईएनटी और ऑडियोलॉजी डिपार्टमेंट के लगातार संपर्क में रहती हैं।    
 
 
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