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इस हफ्ते की किताब

जाकिर हुसैन: अ लाइफ इन म्यूजिक

चित्रसेन मुद्गल

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एक सवाल बार-बार तबला उस्ताद जाकिर हुसैन से पूछा जाता है। आप इतने युवा कैसे दिखते हैं? वह अक्सर राकेश चौरसिया, साबिर खान, जयंती कुमारेश, यू राजेश और नीलाद्री कुमार जैसे युवा संगीतकारों के साथ मंच साझा करते हुए भी देखे जाते हैं। वह कहते हैं, “अपने आस-पास बहुत सारे प्रतिभावान युवा कलाकारों को देखना दिल को सुकून देने वाला होता है। मैं उनका हर प्रकार से समर्थन करना चाहता हूं। इस दौरान मेरा भी फायदा हो जाता है। इससे मेरा संगीत और मैं युवा बना रहता 
हूं। तरोताजा और ऊर्जावान बने रहने का राज यही है।”
ऐसे कई सवाल हैं और ऐसे कई जवाब हैं 'जाकिर हुसैन: अ लाइफ इन म्यूजिक' नाम के किताब में। यह किताब बातचीत पर आधारित है और बात की है नसरीन मुन्नी कबीर ने।
उस्ताद जाकिर हुसैन मंच पर खिले-खिले नजर आते हैं। जाकिर हुसैन जब तबला बजाते हैं, तब न केवल ताल, बल्कि तकनीकी और भावनाओं में एक समानता रहती है और उनकी यही विलक्षण प्रतिभा, उन्हें संगीत जगत में दूसरों से अलग करती है। अपने कंसर्ट के बाद हमेशा ही अपने प्रशंसकों से घिरे रहने वाले जाकिर जब बात संगीत की करते हैं, तब वे नए-नए प्रयोग करते रहने वाले संगीतकार को कुछ नया बता रहे होते हैं। अपने संगीत की तरह, उनके विचार बीते हुए कल और आज के समय के बीच एक पुल का काम करते हैं और यह उनकी रचनात्मक यात्रा की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
वर्ष 1974 में उस्ताद जाकिर हुसैन ने जैज गिटार वादक जॉन मैकलाफ्लिन, वायोलिनिस्ट (वायलिन वादक) एल. शंकर, मृदंग वादक रामनद राघवन और घटम बजाने वाले उस्ताद विक्कु विनायकराम के साथ ‘शक्ति’ के माध्यम से संगीत की एक अलग दुनिया बनाई थी।
‘शक्ति’ में दक्षिण भारतीय संगीत, हिंदुस्तानी और पश्चिमी संगीत का मिला-जुला रूप था।  भले ही संगीत का वह अग्रणी समूह अब बंद हो गया हो, लेकिन संगीत की शक्ति उस्ताद जाकिर हुसैन के जीवन में आज भी बनी हुई है।  वह उनके व्यक्तित्व और संगीत में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जाकिर हुसैन बातचीत के दौरान दूसरों के विचारों को सुनते हैं, समझते हैं, सम्मान देते हैं और इसके बाद अपनी बात रखते हैं। 
किताब नसरीन मुन्नी कबीर और जाकिर हुसैन के बीच पिछले दो दशक के दौरान हुए वार्तालापों पर आधारित है। जाकिर कहते हैं, 
“मैं नहीं चाहता था कि कैसे तबला बजाया जाए, इस पर एक किताब हो। मैं अपने जीवन के किस्से, कहानियां और अनुभवों को बताना चाहता था। बातचीत विश्व के कई शहरों में हुए मेरे कार्यक्रम के दौरान हुई थी।” 
यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि उस्ताद एक वर्ष में 200 से ज्यादा शो करते हैं।   
इस किताब में अतीत की यादें हैं, समकालीन संगीत की बातें हैं और भविष्य का सपना भी । वह कहते हैं, “यह किताब मुझे अपने अतीत के सुनहरे पलों में ले गई। उन बातों को भी याद किया, जब मैंने अपने पिता से तबले का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उनके निधन के 17 वर्ष बाद आज मैं महसूस करता हूं कि कोई एक अदृश्य शक्ति है, जो हमें आज भी एक दूसरे के समीप रखे हुए है। मैंने जिन 
भी महान संगीतकारों के साथ काम किया, चाहे वह पलघट रघु, बालामुरलीकृष्ण, उस्ताद विलायत खान और अमजद अली खान 
उन्होंने मुझे एक अच्छा तबला वादक बनने में मेरी मदद की।   

किताब- जाकिर हुसैन:  अ लाइफ इन म्यूजिक
(जाकिर हुसैन से बातचीत पर नसरीन मुन्नी कबीर ) 
प्रकाशक - हार्पर कोलिन्स पब्लिशर, इंडिया, नोएडा (यूपी) 
मूल्य - 599 रुपये


(मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली से साभार)
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