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Solitude poem by d h lawrence translated by dinkar

विश्व काव्य

'दिनकर' द्वारा अनुदित डी.एच लॉरेंस की कविता 'एकांत'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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डी.एच लॉरेंस अंग्रेज़ी के विश्व विख्यात कवि और उपन्यासकार हैं।

लोग अकेलेपन की शिकायत करते हैं
मैं समझ नहीं पाता
वे किस बात से डरते हैं 

अकेलापन तो जीवन का 
चरम आनंद है जो है निःसंग
सोचो तो, वही स्वच्छंद है 

अकेला होने पर जगते हैं विचार
ऊपर आती है उठकर
अंधकार से नीली झंकार 

जो है अकेला
करता है अपना छोटा-मोटा काम
या लेता हुआ आराम
झांककर देखता है आगे की राह को
पहुंच से बाहर की दुनिया अथाह को

तत्वों के केंद्र-बिंदु से होकर एकतान 
बिना किसी बाधा के करता है ध्यान 
विषम के बीच छिपे सम का
अपने उद्गम का 

अनुवाद : रामधारी सिंह 'दिनकर'

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