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AA GAI BETI MERE GHAR

विश्व काव्य

आ गई बेटी मेरे घर

Rajesh Kumari

10 कविताएं

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मेरी बगिया खिल उठी मौसम निराला हो गया
आ गई बेटी मेरे घर में उजाला हो गया

दीप खुशियों के जले शुभ शंख मानो बज उठे
देखिये साहिब मेरा तो घर शिवाला हो गया

लहलहाई यूं फसल खेतों की मेरी देखिये
सोने चांदी से मढ़ा इक इक निवाला हो गया

बिन सुरा सागर के जैसे खाली था मेरा वजूद
आते ही उसके लबालब ये पियाला हो गया

पढ़ते पढ़ते रात दिन आंखें मेरी थकती नहीं
उसका चेहरा खूबसूरत इक रिसाला हो गया

छोड़ बाबुल की गली को एक दिन वो जायेगी
सोचकर मेरे अभी से दिल पे छाला हो गया

उसकी जानिब गर बुरी आंखें उठें तो खींच ले
ऐसा कातिल अब मेरी आंखों में जाला हो गया।

-राजेश कुमार

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