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सिर्फ़ एक दिन के लिए यह दुनिया, चलो बच्चों को दे दें - नाज़िम हिक़मत

nazim hikmet kavita yah duniya
                
                                                                                 
                            

सिर्फ़ एक दिन के लिए


यह दुनिया
चलो, बच्चों को दे दें
खेलने के लिए
आकर्षक, चमकते गुब्बारे की तरह
सितारों के बीच खेलें वे गाते हुए
चलो, यह दुनिया दे दें बच्चों को

रोटी के एक गर्म टुकड़े की तरह
एक बड़े विशाल सेब की तरह
सिर्फ़ एक दिन के लिए काफ़ी होगा
चलो, दे दें यह दुनिया बच्चों को

सिर्फ़ एक दिन के लिए
दुनिया सीख जाए दोस्ती करना
बच्चों को मिल जाए हमारे हाथों यह दुनिया
और वे लगा दें दुनिया में सनातन वृक्ष

अनुवाद : अनिल जनविज

1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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