बड़ी गर्दिश में तारे थे, तुम्हारे भी हमारे भी - हस्तीमल 'हस्ती'

hastimal hasti ghazal badhi gardish mein taare the tumhare bhi humare bhi
                
                                                             
                            

बड़ी गर्दिश में तारे थे, तुम्हारे भी हमारे भी 
अटल फिर भी इरादे थे, तुम्हारे भी हमारे भी

हमारी ग़लतियों ने उसकी आमद रोक दी वरना
शजर पर फल तो आते थे, तुम्हारे भी हमारे भी 

हमें ये याद रखना है बसेरा है जहाँ सच का
उसी नगरी से नाते थे, तुम्हारे भी हमारे भी 

सिरे से भूल बैठे हैं उसे हम दोनों ‘हस्ती' जी
क़दम जिसने सँभाले थे, तुम्हारे भी हमारे भी 

शहादत माँगता था वक़्त तो हमसे भी ‘हस्ती’ जी
मगर लब पर बहाने थे, तुम्हारे भी हमारे भी 

4 months ago
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