कुछ लोग ख़यालों से चले जाएं तो सोएं - हबीब जालिब

habib jalib ghazal kuch log khayalon se chale jayein to soyein
                
                                                             
                            
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएं तो सोएं
बीते हुए दिन-रात न याद आएं तो सोएं

चेहरे जो कभी हम को दिखाई नहीं देंगे
आ-आ के तसव्वुर में न तड़पाएं तो सोएं

बरसात की रुत के वो तरब-रेज़ मनाज़िर
सीने में न इक आग सी भड़काएं तो सोएं

सुब्हों के मुक़द्दर को जगाते हुए मुखड़े
आंचल जो निगाहों में न लहराएं तो सोएं
4 months ago
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