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Faiz Ahmad Faiz

विश्व काव्य

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की दो सुकून देने वाली नज़्में...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दर्द थम जाएगा ग़म न कर, ग़म न कर 
यार लौट आएँगे, दिल ठहर जाएगा, ग़म न कर, ग़म न कर 
ज़ख़्म भर जाएगा 
ग़म न कर, ग़म न कर 
दिन निकल आएगा 
ग़म न कर, ग़म न कर 
अब्र खुल जाएगा, रात ढल जाएगी 
ग़म न कर, ग़म न कर 
रुत बदल जाएगी 
ग़म न कर, ग़म न कर  आगे पढ़ें

चलो फिर से मुस्कुराएँ 

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