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क़तील शिफाई

विश्व काव्य

चराग़ दिल के जलाओ कि ईद का दिन है: क़तील शिफ़ाई

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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चराग़ दिल के जलाओ कि ईद का दिन है
तराने झूम के गाओ कि ईद का दिन है

ग़मों को दिल से भुलाओ कि ईद का दिन है
ख़ुशी से बज़्म सजाओ कि ईद का दिन है 

हुज़ूर उसकी करो अब सलामती की दुआ 
सर-ए-नमाज़ झुकाओ कि ईद का दिन है 

सभी मुराद हो पूरी हर एक सवाली की 
दुआ को हाथ उठाओ कि ईद का दिन है
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