अपयश को स्वेच्छा से स्वीकार करो… लाओत्से

chinese philosopher lauzi poetry in hindi
                
                                                             
                            

अपयश को स्वेच्छा से स्वीकार करो और
दुर्भाग्य को मानवीय परिस्थिति के रूप में
मान्यता दो

अकीर्ति को स्वेच्छा से स्वीकार करने का
क्या अर्थ है?
अमहत्वपूर्ण होना स्वीकार करो
जिसका संबंध लाभ-हानि से न हो
इसका अर्थ अपयश को स्वेच्छा से
स्वीकार करना है

दुर्भाग्य को मानवीय परिस्थिति के रूप में
मान्यता देने का क्या अर्थ है?
यही, दुग्भाग्य का प्रारब्ध शरीर धारण करने के
साथ होता है
शरीर के अभाव में दुर्भाग्य कहाँ संभव है?
स्वयं को विनम्रता से समर्पित करो
तुम्हारा विश्वास समस्त पदार्थों के संरक्षक के
रूप में स्थापित होगा
अपने स्व की तरह संसार को प्रेम करो
तुम सकल द्रव्यों के संरक्षण के योग्य बन
जाओगे।

साभार- राजकमल प्रकाशन 

3 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X