मैं सड़क के किनारे बैठा हूँ - बर्तोल ब्रेख्त

bertolt brecht translated poem in hindi sadak ke kinaare
                
                                                             
                            

मैं सड़क के किनारे
बैठा हूँ
ड्राइवर
पहिया बदल रहा है।

जिस जगह से
मैं आ रहा हूँ
वह मुझे पसन्द नहीं

जिस जगह
मैं जा रहा हूँ
वह मुझे पसन्द नहीं

फिर क्यों
बेसब्री से मैं
उसे पहिया बदलते
देख रहा हूँ।

1 year ago

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