विदा, प्रिय प्रेमपत्र, विदा, यह उसका आदेश था: अलेक्सांदर पुश्किन

विदा, प्रिय प्रेमपत्र, विदा, यह उसका आदेश था: अलेक्सांदर पुश्किन
                
                                                             
                            विदा, प्रिय प्रेमपत्र, विदा, यह उसका आदेश था
                                                                     
                            
तुम्हें जला दूँ मैं तुरन्त ही यह उसका संदेश था
 
कितना मैंने रोका ख़ुद को कितनी देर न चाहा
पर उसके अनुरोध ने, कोई शेष न छोड़ी राह
हाथों ने मेरे झोंक दिया मेरी ख़ुशी को आग में
प्रेमपत्र वह लील लिया सुर्ख़ लपटों के राग ने
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1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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