आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Vishwa Kavya ›   alaxander pushkin poetry in hindi
alaxander pushkin poetry in hindi

विश्व काव्य

मैंने तुम्हारी हथेलियों को अपने आंसुओं से भिगोया था- पुश्किन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

86 Views

अलेक्जैंडर पुश्किन एक रूसी कवि और साहित्यकार हैं।

दूर अपने घर जातीं तुम
एक अपरिचित देश जा रही थीं
सबसे कठिन असह्य उस पल में
मैंने तुम्हारी हथेलियों को
अपने आँसुओं से भिगोया था
अपने ठण्डी सुन्न पड़ती
उँगलियों से पकड़कर रोकना चाहा था तुम्हें
और तब मेरे दिल ने कहा था --
सदा रहेगा यह दर्द अब तो तुम्हारे पास

तुमने अपना मुँह घुमा लिया था
हटा लिए थे होंठ कठिन क्रूर चुम्बन से
कभी स्वप्न जगाया था तुमने मेरे भीतर
और निष्काषित भी कर दिया था उसी पल
तुमने कहा था -- अगली बार जब हम मिलेंगे
घने औलिव की छाँव में, खुली उजली धूप में
हमारे चुम्बन से यह पीड़ा जा चुकी होगी

आज जहाँ नीला
स्वच्छ आकाश है
और घने पेड़ों की छाँव
कलकल बहती नदी पर
नृत्य करती है
खो गया है सब
वक़्त की अनन्त धारा में
वह रूप, वह पीड़ा
पर यादों में बसा है
वह मधुर चुम्बन
आज भी इन्तज़ार है मुझे,
एक वादा था तुम्हारा...

अँग्रेज़ी से अनुवाद : शैल अग्रवाल
साभार- कविताकोश

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!