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Social Media poetry: अब तो अपने पास हैं केवल बिछड़े यारों की तस्वीरें

Social Media poetry: अब तो अपने पास हैं केवल बिछड़े यारों की तस्वीरें
                
                                                                                 
                            अब तो अपने पास हैं केवल बिछड़े यारों की तस्वीरें
                                                                                                

ख़ाली दस्तरख़्वान पे जैसे हों पकवानों की तस्वीरें

मजबूरी के पिंजरे से मैं तुमको जाते यूं तकता हूं
जैसे परिंदा देख रहा हो उड़ते परिंदों की तस्वीरें

एक तसव्वुर ऐसा भी है हम तुम साथ में बैठे हों और
अपने बच्चे खींच रहे हों फिर हम दोनों की तस्वीरें

आज तो ऐसे बिजली चमकी, बारिश आई, खिड़की भीगी
जैसे बादल खींच रहा हो मेरे अश्कों की तस्वीरें

इक इक करके मैंने अपने चेहरे गिने जब, तौबा तौबा!
छोटी सी दीवार के ऊपर इतने चेहरों की तस्वीरें
 
आ भी जाओ तस्वीरों से कब तक दिल बहलायें 'आलम'
दरवाज़ों से पार नहीं करतीं दरवाज़ों की तस्वीरें

साभार मुकेश आलम की फेसबुक वॉल से
3 weeks ago

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