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atal Bihari Vajpayee

वायरल

हे हिंदी के प्यारे कुमार !

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हे नव भारत के निर्माता !
हे आर्यवर्त के यशगाता !
हे हिंदी के प्यारे कुमार !
माँ वाणी के मन की पुकार !
हे शक्ति भरे पोखरण नाद !
हे निष्कलंक, हे निर्विवाद !
हे राजनीति के तेजपुंज !
हे सदा सुगंधित अमर कुंज !
हे कुशल नीति के प्रतिपालक !
हे शांतिदूत, हे जननायक !
हे नम्र भाव के महासिंधु !
हे वक्तव्यों के केंद्रबिंदु !
हे प्रबल सबल, हे सरल तरल !
हे दृढ़ सुदृढ़ निश्चय- अटल !
स्वीकार करो शतकोटि नमन,
भारत के कण कण का क्रंदन।
कर देती थी जो चुप विपक्ष,
वह गिरा गई अब मौन कक्ष।
चिरनिद्रा में सो गया सजल ,
भू का अति दुर्लभ एक कमल।
हर आर्त्त हृदय की अश्रु धार,
धो रही चरण को बार बार।
सम्पूर्ण देश का लुटा लुटा,
लगता है घर-घर, द्वार-द्वार।
तुम चले गए पर सम्भव हो,
तो यह प्रस्ताव न ठुकराना।
जब मंदिर भाव बना लें तो,
तुम दीप जलाने आ जाना...

-आयुष चराग़
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