आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Viral Kavya ›   Again daughter

वायरल

पुनः बेटी

Manoj Yadav

5 कविताएं

198 Views
एक सुहागन चली है बनने को मां
सोचती है बनूं पहले बेटे की मां
विधाता ने सुनी न उसकी व्यथा
जन्म देकर बनी वो एक बेटी की मां
धैर्य धारण किए उसने पाला उसे
एक अच्छे से सांचे में ढला उसे
एक क्षण सारे कष्टों को भूली थी वह
बेटी हंस करके बोली जब अम्मा उसे
एकदा उसने फिर से सब सपने संजोयी
अपनी बीती कहानी पर बहुत ही ओ रोई
बोली मेरी वो प्यारी सी बेटी सुनो
आशा है मुझको आएगा तेरा भ्राता
भैया की अपने बनेगी तुम बहना
मैं भी बनूंगी एक बेटे की माता
क्या क्या सोची थी और वही लेटी हुई
उठ कर देखी उनकी बेटी हुई

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!