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सोशल मीडिया: केवल एक फूल के खिलने जैसा था आगमन तुम्हारा

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सोशल मीडिया: केवल एक फूल के खिलने जैसा था आगमन तुम्हारा

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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केवल एक फूल के खिलने जैसा था आगमन तुम्हारा,
किंतु तुम्हारा जाना जैसे जंगल भर में आग लग गई !

तुम बोले तो जैसे निर्जन में कोई चिड़िया बोली हो
किंतु तुम्हारे चुप रहने ने सदियों तक हिमखण्ड गिराये,
तुमको छूना जैसे मुझ में पल भर सावन भादों उतरे
तुमसे दूरी जैसे मुझसे सारे मौसम हुए पराये !

लगता है मेरे जीवन में सब कुछ ही था सृजन तुम्हारा,
संग तुम्हारे विदा हुआ सब और नगर में आग लग गई। आगे पढ़ें

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