सोशल मीडिया: प्रेम में प्राप्ति की इच्छा 

तुम्हारा हिज्र बहुत दूर से गुज़र जाए: कुशल दौनेरिया
                
                                                             
                            प्राप्ति की इच्छा प्रेम की दीमक है 
                                                                     
                            
चाट जाती है पूरी पूरी काठ 
और जैसे टूटती है बीच रात नींद 
वैसे ही टूटता है प्रेम 
करकता रहता है भीतर ही भीतर

जिस क्षण में होता है प्रेम 
उस क्षण में ही पूर्ण हो जाता है 
वह बस स्टॉप पर खड़ा मुसाफिर नहीं 
जो समय को तरफ लाचार निगाहों से देखे 
खोने-पाने के भय से मुक्त नहीं हो सका जो 
वह प्रेम भला क्या मुक्ति दे सकेगा 
और जो मुक्ति नहीं दे सकता 
वह कुछ भी हो सकता है 
प्रेम नहीं हो सकता  आगे पढ़ें

3 days ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X