ज्ञान प्रकाश आकुल: कवि जी, झूठ मूठ ही गाओ !

ज्ञान प्रकाश आकुल: कवि जी, झूठ मूठ ही गाओ !
                
                                                             
                            कवि जी,
                                                                     
                            
झूठ मूठ ही गाओ ! 
सच कहना है कठिन मगर तुम 
इतना मत हकलाओ! 

फूलदान  में  फूल  बेहया  के  तुमने पहुँचाये
फिर उनको बेला बतलाकर गीत गंध के गाये
जो अब तक गाते आये हो
उसको ही दोहराओ!
कवि जी,
झूठ मूठ ही गाओ ! आगे पढ़ें

2 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X