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Social Media Poetry: उम्र बढ़ती जा रही है हो रहे हैं दुख सयाने !

सोशल मीडिया
                
                                                                                 
                            उम्र  बढ़ती  जा  रही है
                                                                                                

हो  रहे  हैं  दुख सयाने!

दुख  नहीं  आते न जाने क्यों  खिलौने टूटने से
दुख नहीं आते किसी के  भी सफर में छूटने से

अब बिलखकर टूटने के
हो  गये   किस्से  पुराने!

अब  अँधेरों  से ज़रा भी डर नहीं लगता अकेले
रोज़  सोते  हैं  अँधेरे  से  लिपटकर  बाँह  में ले आगे पढ़ें

6 days ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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