ध्रुव गुप्त: सहपाठी लड़कियां स्मृतियां होती हैं, उस प्रेम की जो न कभी कहा गया, न सुना गया

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                            कॉलेज में साथ पढ़ने वाली लड़कियां
                                                                     
                            
उम्र के ढलते पड़ावों पर
कहीं भूले-भटके मिल जाएं
तो वे हंसती बहुत हैं
उन्हें हंसना भी चाहिए
हवा के अचानक उठे मद्धम झोंके
और फूलों पर गिरी ओस की तरह आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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