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वायरल: मैं जीवन के गीत लिखूंगा, तुम प्राणों के साज साधना

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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मैं जीवन के गीत लिखूंगा, तुम प्राणों के साज साधना
मैं पनघट की प्यास लिखूंगा, तुम प्रीत के राग साधना।

मेरे मन के सूने आंगन में जब-जब सांझ उतरती है,
याद तुम्हारी तब-तब आती जब-जब बारिश होती है,
मैं मन के अहसास लिखूंगा, तुम सांसों में उन्हें बांधना
मैं जीवन के गीत लिखूंगा, तुम प्राणों के साज साधना।

सूनी रातों के वीराने में, मधुर मिलन की ध्वनियां सुनता हूं,
हरी-भरी घासों पर अटकी तेरी-मेरी स्मृतियां चुनता हूं,
मैं निर्झर का निनाद लिखूंगा, तुम अपनी लय में उसे साधना
मैं गंगा की मौज लिखूंगा, तुम उन्मुक्त लहरों को बांधना।

मैं जीवन के गीत लिखूंगा, तुम प्राणों के साज साधना
मैं पनघट की प्यास लिखूंगा, तुम प्रीत के राग साधना।।

- अनुपम निशान्त
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