सोशल मीडिया: मृत्यु पर लिखने के लिए मरना ज़रूरी नहीं यह बात कई बार मरने के बाद समझ आती है

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                            नदी पर कविता लिखने के लिए 
                                                                     
                            
कवि को नाव होना होता है 
आग पर लिखने के लिए राख 

पानी पर पानी बन कर ही लिखा जा सकता है 
धरती पर लिखने के लिए बीज बनना ज़रूरी है 

आकाश पर कविता लिखने के लिए 
जो पक्षी बने उनके पंख जल गए 
जो तितली बने वे असफल रहे 
जो हवा बने उनकी कविता कभी ख़त्म ही नहीं हुई 
आकाश पर कविता लिखने के लिए 
एक स्त्री की स्वप्निल आँख होना होता है 

मृत्यु पर लिखने के लिए मरना ज़रूरी नहीं 
यह बात कई बार मरने के बाद समझ आती है 
जीवन पर कविता लिखी ही नहीं जा सकती 
जीवन बीत जाता है यह बात समझने में  आगे पढ़ें

1 week ago

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