'ज़ेहन' की बात करते चुनिंदा शेर

zehan selectec shayari collection
                
                                                             
                            

बंद कमरे में ज़ेहन क्या बदले
घर से निकलो तो कुछ फ़ज़ा बदले
- महताब आलम 


अक़्ल से सिर्फ़ ज़ेहन रौशन था
इश्क़ ने दिल में रौशनी की है
- नरेश कुमार शाद 

आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X