शायरी: ग़म बयां करने का कोई और ढंग ईजाद कर

शायरी: ग़म बयां करने का कोई और ढंग ईजाद कर
                
                                                             
                            एक बे-नाम उदासी से भरा बैठा हूं 
                                                                     
                            
आज दिल खोल के रोने की ज़रूरत है मुझे। 
-अंजुम सलीमी

अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं। 
- साहिर लुधियानवी  

इस जुदाई में तुम अंदर से बिखर जाओगे
किसी माज़ूर को देखोगे तो याद आऊंगा। 
- वसी शाह   आगे पढ़ें

1 month ago

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