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तारिक़ नईम की ग़ज़ल: ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते 
                                                                                                

कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते 

मिरे माह तुम तो हिजाब ही में रहे मगर 
हमें ताब थी तब-ओ-ताब में तुझे देखते 

कभी कोई बाबत-ए-हुस्न हम से जो पूछता 
तो हम अहल-ए-इश्क़ जवाब में तुझे देखते  आगे पढ़ें

1 week ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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