इस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझको - शारिक़ कैफ़ी

shariq kaifi ghazal is dhoke ne tod diya hai itna mujhko
                
                                                             
                            इस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझको
                                                                     
                            
अब कुछ भी समझा लेती है दुनिया मुझको

यारों ने क्या ख़ूब जुनूं का तोड़ निकाला
सबने मिल कर छोड़ दिया समझाना मुझको

उसने मुज़्रिम ठहराया तो मान गया मैं 
वैसे कोई याद नहीं था वादा मुझको

औरों की जां मैं ख़तरे में डाल न पाया
कश्ती कश्ती ढ़ूंढ़ रहा था दरिया मुझको

इस सूरत में यार भला क्या कर सकते थे
तोड़ रहा था अन्दर का सन्नाटा मुझको

मुझको पढ़ना मुझे समझना क्या लाज़िम है
झूम झूम के बन्द करो दोहराना मुझको 
1 month ago

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