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Parveen Shakir: बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की

parveen shakir ghazal dasne lage hain khwab magar kis se boliye
                
                                                                                 
                            

डसने लगे हैं ख़्वाब मगर किस से बोलिए


मैं जानती थी पाल रही हूँ संपोलिए

बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की
और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए

पलकों पे कच्ची नींदों का रस फैलता हो जब
ऐसे में आँख धूप के रुख़ कैसे खोलिए

तेरी बरहना-पाई के दुख बाँटते हुए
हम ने ख़ुद अपने पाँव में काँटे चुभो लिए

मैं तेरा नाम ले के तज़ब्ज़ुब में पड़ गई
सब लोग अपने अपने अज़ीज़ों को रो लिए

ख़ुश-बू कहीं न जाए प इसरार है बहुत
और ये भी आरज़ू कि ज़रा ज़ुल्फ़ खोलिए

तस्वीर जब नई है नया कैनवस भी है
फिर तश्तरी में रंग पुराने न घोलिए

2 months ago

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