'पहाड़ों' के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

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ख़ुदा के ज़िक्र में मशग़ूल हैं जो मस्त पहाड़
समझ गए हैं यक़ीनन अदा-ए-वक़्त पहाड़
- फ़ैसल नदीम फ़ैसल 


दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
- निदा फ़ाज़ली

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4 weeks ago

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