नोशी गिलानी: तिरा ज़िक्र मेरी किताब में नहीं आएगा

Noshi Gilani tera zikra meri kitab main nahi ayega
                
                                                             
                            किसी हर्फ़ में किसी बाब में नहीं आएगा 
                                                                     
                            
तिरा ज़िक्र मेरी किताब में नहीं आएगा 
 
नहीं जाएगी किसी आँख से कहीं रौशनी 
कोई ख़्वाब उस के अज़ाब में नहीं आएगा 
 
कोई ख़ुद को सहरा नहीं करेगा मिरी तरह 
कोई ख़्वाहिशों के सराब में नहीं आएगा 
 
दिल-ए-बद-गुमाँ तिरे मौसमों को नवेद हो 
कोई ख़ार दस्त-ए-गुलाब में नहीं आएगा 
 
उसे लाख दिल से पुकार लो उसे देख लो 
कोई एक हर्फ़ जवाब में नहीं आएगा 
 
तिरी राह तकते रहे अगरचे ख़बर भी थी 
कि ये दिन भी तेरे हिसाब में नहीं आएगा 
4 months ago

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