Nida Fazli poetry: इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सब की दुनिया

निदा फ़ाज़ली
                
                                                             
                            अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला 
                                                                     
                            
हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला 

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा 
जिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला 

उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मा'लूम न था 
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला  आगे पढ़ें

5 months ago

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