नासिर काज़मी: निय्यत-ए-शौक़ भर न जाए कहीं

नासिर काज़मी: अपनी धुन में रहता हूँ मैं भी तेरे जैसा हूँ
                
                                                             
                            निय्यत-ए-शौक़ भर न जाए कहीं 
                                                                     
                            
तू भी दिल से उतर न जाए कहीं 

आज देखा है तुझ को देर के ब'अद 
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं 

न मिला कर उदास लोगों से 
हुस्न तेरा बिखर न जाए कहीं  आगे पढ़ें

4 months ago

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