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Mohammad Alvi: मोहम्मद अल्वी की ग़ज़ल 'कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए'

mohammad alvi ghazal kuch toh is dil ko saza di jaaye
                
                                                                                 
                            
कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए

उस की तस्वीर हटा दी जाए

ढूँढ़ने में भी मज़ा आता है
कोई शय रख के भुला दी जाए

नाम लिख लिख के तिरा काग़ज़ पर
रौशनाई भी गिरा दी जाए

नाव काग़ज़ की बना कर उस को
बहते पानी में बहा दी जाए

रात को चुपके से इक इक घर की
क्यूँ न ज़ंजीर लगा दी जाए

नींद में चौंक पड़ेगा कोई
आओ उस दर पे सदा दी जाए

आख़िरी साँस महक जाएगी
उस के दामन की हवा दी जाए

सब के सब याद चले आते हैं
आज किस किस को दुआ दी जाए

'अल्वी' होटल में ठहर सकता है
क्यूँ उसे घर में जगह दी जाए
3 weeks ago

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