रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहां कोई न हो - मिर्ज़ा ग़ालिब

mirza ghaib ghazal rahiye ab aisi jagah chal kar jahan koi na ho
                
                                                             
                            

रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहां कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बां कोई न हो

बे-दर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिए
कोई हम-साया न हो और पासबां कोई न हो

पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाइए तो नौहा-ख़्वां कोई न हो

4 weeks ago

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