'किनारों' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

kinara selected shayari collection
                
                                                             
                            

किनारे ही से तूफ़ां का तमाशा देखने वाले
किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ां नहीं होता
- जगन्नाथ आज़ाद


ग़म-ए-जहान ओ ग़म-ए-यार दो किनारे हैं
उधर जो डूबे वो अक्सर इधर निकल आए
- अरशद अब्दुल हमीद 

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1 month ago

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