ख़ुमार बाराबंकवी: आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे

ख़ुमार बाराबंकवी: आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे
                
                                                             
                            आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे 
                                                                     
                            
आ जाओ कि फिर देखने वाले न रहेंगे 

जा शौक़ से लेकिन पलट आने के लिए जा 
हम देर तलक ख़ुद को सँभाले न रहेंगे 

ऐ ज़ौक़-ए-सफ़र ख़ैर हो नज़दीक है मंज़िल 
सब कहते हैं अब पाँव में छाले न रहेंगे 

जिन नालों की हो जाएगी ता-दोस्त रसाई 
वो सानेहे बन जाएँगे नाले न रहेंगे  आगे पढ़ें

1 month ago

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