'ख़ुद्दारी' पर कहे गए शेर...

'ख़ुद्दारी' पर कहे गए शेर...
                
                                                             
                            ख़ुद्दारी और आत्मसम्मान केवल शायरों/कवियों के लिए ही नहीं बल्कि हर इंसान के जीवन में एक अमूल्य निधि की तरह है। यह एक ऐसी पूंजी है जिसकी बदौलत आपका मस्तक हमेशा ऊंचा रहता है और आप आत्मविश्वास से भरे रहते हैं। पेश है 'खुद्दारी' पर चुनिंदा शायरों के अल्फ़ाज़... 
                                                                     
                            

पाँव कमर तक धँस जाते हैं धरती में
हाथ पसारे जब ख़ुद्दारी रहती है
- राहत इंदौरी

दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है 
मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है 
- फ़ानी बदायुनी

किसी को कैसे बताएँ ज़रूरतें अपनी 
मदद मिले न मिले आबरू तो जाती है 
- वसीम बरेलवी आगे पढ़ें

1 day ago

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