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Urdu Ghazal: जोश मलीहाबादी की ग़ज़ल 'दिल मिला है जिन्हें हमारा सा, तल्ख़ उन सब की ज़िंदगानी है'

josh malihabadi ghazal jab se marne ki ji mein thaani hai
                
                                                                                 
                            

जब से मरने की जी में ठानी है


किस क़दर हम को शादमानी है

शाइरी क्यूँ न रास आए मुझे
ये मिरा फ़न्न-ए-ख़ानदानी है

क्यूँ लब-ए-इल्तिजा को दूँ जुम्बिश
तुम न मानोगे और न मानी है

आप हम को सिखाएँ रस्म-ए-वफ़ा
मेहरबानी है मेहरबानी है

दिल मिला है जिन्हें हमारा सा
तल्ख़ उन सब की ज़िंदगानी है

कोई सदमा ज़रूर पहुँचेगा
आज कुछ दिल को शादमानी है

2 months ago

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