गुलज़ार: शाम से आज साँस भारी है, बे-क़रारी सी बे-क़रारी है 

gulzar
                
                                                             
                            शाम से आज साँस भारी है 
                                                                     
                            
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है 

आप के बा'द हर घड़ी हम ने 
आप के साथ ही गुज़ारी है 

रात को दे दो चाँदनी की रिदा 
दिन की चादर अभी उतारी है  आगे पढ़ें

5 months ago

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