फ़रह शाहिद: चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी 

उर्दू अदब
                
                                                             
                            पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था 
                                                                     
                            
महके हुए दिन-रात थे मेरे और दिसम्बर था 

चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी 
उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था 

बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी 
सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था 

भीगी ज़ुल्फ़ें भीगा आँचल नींद थी आँखों में 
कुछ ऐसे हालात थे मेरे और दिसम्बर था  आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X