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Dushyant Kumar Ghazal: इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है

dushyant kumar ghazal iss nadi ki dhaar mein thandi hawa aati toh hai
                
                                                                                 
                            

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है


नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है

एक चिंगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो
इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है

एक खंडर के हृदय सी एक जंगली फूल सी
आदमी की पीर गूँगी ही सही गाती तो है

एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी
ये अँधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है

निर्वचन मैदान में तेटी हुई है जो नदी
पत्थरों से ओट में जो जा के बतियाती तो है

दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर
और कुछ हो या न हो आकाश सी छाती तो है

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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