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Urdu Shayari: बिस्मिल सईदी की ग़ज़ल 'ये मैं हूँ तुझ में अब या मुझ में तू है'

bismil saeedi ghazal ye main hoon tujh mein ab ya mujh mein tu hai
                
                                                                                 
                            

ये मैं हूँ तुझ में अब या मुझ में तू है


ये कौन अब आइने में रू-ब-रू है

ये दिल है और है तेरा तसव्वुर
ज़बाँ है और तेरी गुफ़्तुगू है

उन्हीं का है ये दिल भी आरज़ू भी
न दिल मेरा न मेरी आरज़ू है

रहा करता हूँ कुछ खोया हुआ सा
ख़ुदा जाने मुझे क्या जुस्तुजू है

हुआ हूँ मैं फ़ना-फ़िल-इश्क़ 'बिस्मिल'
न अब दिल है न दिल की आरज़ू है

2 months ago

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