इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह: अनवर शऊर

ज़िंदगी से एक दिन मौसम ख़फ़ा हो जाएँगे: अहमद मुश्ताक़।
                
                                                             
                            इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह 
                                                                     
                            
ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह 

कह तो सकता हूँ मगर मजबूर कर सकता नहीं 
इख़्तियार अपनी जगह है बेबसी अपनी जगह 

कुछ न कुछ सच्चाई होती है निहाँ हर बात में 
कहने वाले ठीक कहते हैं सभी अपनी जगह  आगे पढ़ें

2 days ago
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