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Aftab Muztar Ghazal: आफ़्ताब मुज़्तर की ग़ज़ल 'हर ज़ुल्म तेरा याद है भुला तो नहीं हूँ'

aftab muztar ghazal har zulm tera yaad hai bhoola toh nahin hoon
                
                                                                                 
                            हर ज़ुल्म तेरा याद है भुला तो नहीं हूँ
                                                                                                

ऐ वादा फ़रामोश मैं तुझ सा तो नहीं हूं

साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना
मैं डूब रहा हूं अभी डूबा तो नहीं हूं 

चुपचाप सही मस्लहतन वक़्त के हाथों
मजबूर सही वक़्त से हारा तो नहीं हूँ

मुज़्तर क्यों मुझे देखता रहता है ज़माना
दीवाना सही उनका तमाशा तो नहीं हूँ
1 month ago

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