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Raksha Bandhan 2022: सुभद्राकुमारी चौहान की कविता- राखी की चुनौती

कविता
                
                                                                                 
                            

बहिन आज फूली समाती न मन में।


तड़ित आज फूली समाती न घन में॥
घटा है न झूली समाती गगन में।
लता आज फूली समाती न बन में॥

कहीं राखियाँ हैं, चमक है कहीं पर,
कहीं बूँद है, पुष्प प्यारे खिले हैं।
ये आई है राखी, सुहाई है पूनो,
बधाई उन्हें जिनको भाई मिले हैं॥

मैं हूँ बहिन किंतु भाई नहीं है।
है राखी सजी पर कलाई नहीं है॥
है भादों, घटा किंतु छाई नहीं है।
नहीं है ख़ुशी, पर रुलाई नहीं है॥

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1 month ago

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