आज का शब्द: व्यथा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता

aaj ka shabd vyatha suryakant tripathi nirala hindi kavita
                
                                                             
                            हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है 'व्यथा' जिसका प्रयोग मानसिक व शारीरिक क्लेश अथवा पीड़ा व वेदना के अर्थ में किया जाता है। इस शब्द को महाकवि निराला ने अपनी कविता में प्रयोग किया है।
                                                                     
                            

भर देते हो
बार-बार, प्रिय करुणा की किरणों से
क्षुब्ध हृदय को पुलकित कर देते हो।

मेरे अन्तर में आते हो, देव निरन्तर,
कर जाते हो व्यथा-भार लघु
बार-बार कर-कंज बढ़ाकर;

अंधकार में मेरा रोदन
सिक्त धरा के अंचल को
करता है क्षण-क्षण

कुसुम-कपोलों पर वे लोल शिशिर-कण
तुम किरणों से अश्रु पोंछ लेते हो,
नव प्रभात जीवन में भर देते हो । 
1 week ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X